माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी
भोपाल, सोमवार, 18 मार्च 2019 (उकान) : झारखंड राज्य के उच्च न्यायालय ने एक जेसुइट पुरोहित को पांच महिलाओं के अपहरण और बलात्कार के मामले में गिरफ्तार होने के नौ महीने बाद जमानत दे दी है।
फादर अल्फोंस आइंद को दो दिन पहले जारी किए गए अपने जमानत आदेश में अदालत द्वारा निर्धारित सभी जमानत शर्तों को पूरा करने के बाद 15 मार्च को जेल से रिहा कर दिया गया था।
शर्तों में उनके पासपोर्ट को जमा करने और स्थानीय अदालत में नियमित उपस्थिति शामिल है जहां उनके मामले की सुनवाई चल रही है। उन्हें खूंटी जिले से बाहर जाने के लिए अदालत की अनुमति की आवश्यकता है। उन्हें 50,000 रुपये (यूएस $ 700) एक निश्चित बांड प्रस्तुत करने के लिए भी कहा गया था।
फादर आइन्द के मामले में सहायता कर रहे, फादर महेंद्र पीटर तिग्गा ने कहा, "सभी औपचारिकतायें और शर्तें पूरी की गईं हैं।”
फादर आइन्द को खूंटी जेल में पिछले साल 22 जून को एक स्कूल के परिसर से पांच युवा महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं के अपहरण और सामूहिक बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
19 जून को, मोटरसाइकिल पर छह लोगों ने खूंटी धर्मप्रांत के तहत कोचांग गांव में जेसुइट पुरोहितों द्वारा संचालित स्टॉकमैन मेमोरियल मिडिल स्कूल में एक नुक्कड़ नाटक का मंचन कर रहे पांच युवतियों का कथित रूप से अपहरण और बलात्कार किया गया।
उच्च न्यायालय ने 7 फरवरी को इस मामले में फादर आइन्द को जमानत दे दी थी जिसमें उन्हें सामूहिक बलात्कार में एक साजिश का हिस्सा होने का आरोप लगाया था। परंतु उनकी रिहा नहीं हो सकी क्योंकि संजय शर्मा ने 21 जून को एक दूसरा मामला दर्ज किया था। उसने फादर पर पुलिस को मामले की रिपोर्ट करने में अवैध रूप से चूक करने का आरोप लगाया, एक अपराध करने के इरादे से एक दवा या जहर का प्रबंध करने तथा आपराधिक धमकी और अपनी जब्ती को रोकने के लिए संपत्ति को धोखाधड़ी से हटाने का मामला दर्ज किया था।
इलाके के एक सामाजिक कार्यकर्ता जेसुइट फादर जेवियर सोरेंग ने उका न्यूज को बताया कि उन्हें 22 फरवरी को दस्तावेजी समर्थन के साथ उच्च न्यायालय के समक्ष एक पूरक आवेदन दायर करना था ताकि यह दिखाया जा सके कि फादर की रिहाई अदालत की कार्यवाही को प्रभावित नहीं करेगी।
फादर आइंद जो स्थानीय पल्ली पुरोहित भी हैं, इनके निमंत्रण पर, लड़कियों की तस्करी के बारे में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने हेतु एक टीम आई थी। कथित अपहृत बलात्कार पीड़िता और दो धर्मबहनें भी इस टीम में थी।
कलीसिया के अधिकारियों का कहना है कि 2014 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सत्ता में आने के बाद से राज्य में ख्रीस्तियों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण माहौल के बीच सभी आरोप लगाए गए हैं।
झारखंड में एक बड़ी आबादी आदिवासी ख्रीस्तियों की है जो कुछ क्षेत्रों के चुनाव में एक निर्णायक कारक हो सकती है।
राज्य के 32 मिलियन लोगों में से एक मिलियन से अधिक ख्रीस्तीय, लगभग सभी आदिवासी लोग हैं। खूंटी जिले में ख्रीस्तीय आबादी और भी ज्यादा है, जहां 532,000 लोगों में से 25 प्रतिशत लोगों के ख्रीस्तीय होने का अनुमान है।