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Vatican News
प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर  (AFP or licensors)

चार सदियों से कार्मेलाइट धर्मसंघियों की उपस्थिति एशिया में

विश्व भर के कार्मेलाइट धर्मसंघियों के पुरोहित 400 साल पहले एशिया आये पहले पुरोहितों की याद में उनके प्रति आभार प्रकट करने हेतु भारत के ओल्ड गोवा में एकत्रित हुए हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

पणजी, बुधवार 13 फरवरी 2019 ( उकान) : कार्मेल धर्मसंघियों ने ओल्ड गोवा में समारोही ख्रीस्तयाग के साथ एशिया में अपने 400 साल के अस्तित्व के सप्ताह भर के समारोहों का समापन किया।  ओल्ड गोवा से ही धर्मसंघ ने अपनी यात्रा शुरू की थी।

धन्यवादी ख्रीस्तयाग

पश्चिमी भारतीय तटीय शहर के सी महागिरजाघर में 10 फरवरी को दुनिया भर से आये कार्मेल धर्मसंघ के 200 से अधिक पुरोहितों ने पवित्र युखरीस्तीय समारोह में भाग लिया और इस क्षेत्र के प्रथम पुरोहितों को विशेष रुप से याद किया।

कार्मेलाइट पुरोहितों और मिशनरियों की कब्रों पर माल्यार्पण किया गया था जिनकी कब्रों की खोज 1985 में एक खुदाई के दौरान हुई थी।

संत पापा क्लेमेंट आठवें द्वारा 1604 में उन्हें एशिया जाने की अनुमति देने के बाद वे सन् 1619 में गोवा आये।

साप्ताहिक समारोह

सप्ताह भर के समारोहों में कार्मेलाइट धर्मसंध के जेनरल फादर सवेरियो कानिस्त्रा और उनके सलाहकार भी उपस्थित थे। जेनरल फादर सवेरियो ने सम्मेलन के विषय "करिश्मा की घोषणा हेतु उद्देश्य, विधि और विषय" को प्रस्तुत किया।

करीब 73 वरिष्ठ कार्मेलाइट फादरों के ने विभिन्न भाषाओं में अपने अनुभव को साझा करते हुए भविष्य के प्रेरितिक कार्यों पर चर्चा की।

10 फरवरी को पवित्र मिस्सा के दौरान, गोवा और दामाओ के महाधर्माध्यक्ष फ़िलिप नेरी फेर्रो ने दुखियों और वंचितों के प्रति विनम्र, निस्वार्थ और संवेदनशील रहते हुए येसु में अपने विश्वास को गहरा करने हेतु प्रेरित किया।

पुस्तक का विमोचन

पवित्र मिस्सा के बाद, केरल में स्थित सिरो-मालाबार कलीसिया के प्रमुख कार्डिनल जॉर्ज एलेनचेरी ने ‘भारत में कार्मेल की पहली नींव’ शीर्षक एक पुस्तक का विमोचन किया।

कार्मेलाइट्स ऑफ मेरी इम्माकुलेट धर्मसंध के जेनरल फादर पॉल एनचांडी ने ‘एक कॉफी टेबल’ नामक पुस्तक का विमोचन किया। यह भारत के पुरुषों का पहला स्थानीय धर्मसंध है।

8 फरवरी को, जेनरल  फादर कानिस्ट्रा ने धन्य फादर देवनीसियुस और धन्य रेडेम्पटुस के नाम पर पवित्र मिस्सा का अनुष्ठान किया, जो समाज के पहले शहीद थे, जिन्हें पुराने गोवा में पहले कार्मेलाइट कॉन्वेंट के खंडहरों के बीच रखा गया था।

भारत में सात कार्मेलाइट प्रोविंस हैं कार्मेलाइट पुरोहितों की संख्या 1000 है। 34 क्लोस्टर्ड कार्मेल कोन्वेंट हैं जहाँ करीब 500 कार्मेल धर्मबहनें रहती हैं।

13 February 2019, 16:18