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आसिया बीबी की तस्वीर फांसी के फंदे के साथ आसिया बीबी की तस्वीर फांसी के फंदे के साथ  (ANSA)

अपनी बेटियों की सुरक्षा हेतु आसिया बीबी की चिंता

जोसेफ नादिम आसिया बीबी को 2010 में मृत्यु दण्ड मिलने के समय से ही, उनके परिवार की देखभाल कर रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट द्वारा 31 अक्टूबर को उन्हें आरोपों से बरी किये जाने के बारे में चर्च इन नीड से बातें की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

आसिया बीबी जो अब तक अपने बच्चों से मुलाकात नहीं कर पायी है अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर परेशान है। जोसेफ नादिम, जो उनके परिवार की देखभाल करता आया है, उन्होंने कलीसिया की ओर से मदद करने वाले फाऊंडेशन "चर्च इन नीड" से बातें की जो विश्वभर में अत्याचार के शिकार लोगों की मदद करता है।  

नादिम ने कहा, "हम डरे हुए हैं। कुछ दिनों पहले इस्लामियों ने हमारे घर के गेट के पास गोली चलायी थी। हम लगातार धमकियाँ पा रहे हैं और हमारा पीछा किया जाता है।" 

आसिया बीबी एवं उनके पति असिक अशिक्षित हैं जिसके कारण नादिम ने वकिलों के साथ उनकी मदद की तथा असिक एवं उनकी छोटी बेटी आइशाम को विदेश यात्रा में उनका साथ दिया। उन्होंने उनकी पीड़ा का साक्ष्य दिया तथा आसिया के लिए समर्थन प्राप्त किया।

31 अक्टूबर को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने आसिया बीबी को निर्दोष मानकर, उन्हें जेल से रिहा किये जाने का आदेश दिया।

दो परिवारों पर निशाना

आज, नादिम का परिवार जो आसिय बीबी के बच्चों के लिए शरण स्थान है खतरे में है। नादिम ने कहा, जैसे ही आसिया बीबी को रिहा किया गया, हमें भागना पड़ा। उनकी पत्नी एवं आसिया के पति सरकार के संरक्षण में सुरक्षित स्थान पर हैं किन्तु उनका परिवार उनके साथ नहीं रह सकता।

तब से नादिम के परिवार एवं आसिया की दोनों बेटियों को चार बार स्थान बदलना पड़ा है। इस्लामी उनकी खोज में हैं तथा जब कभी उन्हें खतरे का एहसास होता है वे तुरन्त वहाँ से भाग जाते हैं। यहाँ तक कि उन्हें भोजन खरीदना भी मुश्किल हो जाता है। वे केवल रात को अपना चेहरा ढ़क कर बाहर निकलते हैं।

नादिम ने कहा कि आसिया बीबी के रिहा होने के तुरन्त बाद उन्होंने उनसे मुलाकात की थी किन्तु फोन पर वे हर रोज बात करते हैं और वह अपनी बेटियों के लिए बहुत चिंतित है। 

इन सभी घटनाओं के बावजूद आसिया बीबी के साहस की सराहना करते हुए नादिम कहते हैं कि वह एक असाधरण महिला है। प्रभु पर उसका विश्वास अटूट और असीम है। यह अजीब लग सकता है कि इस कठिन परिस्थिति में वह हमें ढाढ़स देती है। वह हमें निराश नहीं होने की प्रेरणा देती है तथा कहती है कि उन्होंने जिस स्थिति को पार किया है उसकी तुलना में यह एक छोटा समय है जो जल्द ही पार हो जाएगा।

पुनः एक साथ मिल पाने की उम्मीद

एशा एवं आइशाम ने अब तक अपनी माता से मुलाकात नहीं की है किन्तु उन्होंने फोन पर बात करने के द्वारा अपने परिवार के जीवन में थोड़ा-सा अच्छा महसूस किया है। उन्होंने आसिया का उसकी बेटियों के साथ पहले फोन की याद करते हुए कहा कि दोनों बहनें खुशी से घंण्टों रोती रहीं। आशिया की आशा है कि वह जल्द ही अपने परिवार के साथ मुलाकात कर पायेगी तथा उनके साथ देश से बाहर चली जायेगी।  

नादिम ने कहा कि सुरक्षित स्थान पाने के लिए वे पाकिस्तान छोड़ना चाहते हैं। चर्च इन नीड पहला दल है जिसने उन्हें मदद करने के लिए सबसे पहले हाथ बढ़ाया है। दोनों परिवारों को उम्मीद है कि वे क्रिसमस एक साथ रोम में मनायेंगे।

 

 

29 November 2018, 17:43