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मरिया मेजर महागिरजाघर में माता मरियम एवं संत अगुस्टीन गिरजाघर में संत मोनिका से प्रार्थना करते संत पापा मरिया मेजर महागिरजाघर में माता मरियम एवं संत अगुस्टीन गिरजाघर में संत मोनिका से प्रार्थना करते संत पापा 

संत मोनिका महिलाओं की आदर्श

संत अगस्टीन की माँ संत मोनिका ने जीवन की कठिन परिस्थिति में, ईश्वर की इच्छा को स्वीकार करना, सीखने के द्वारा, विश्वास को बनाये रखा। उसकी ताकत प्रार्थना थी। संत पापा ने 27 अगस्त को संत मोनिका के पर्व दिवस पर एक ट्वीट प्रेषित कर सभी माताओं को संत मोनिका का अनुकरण करने हेतु प्रोत्साहन दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 28 अगस्त 2018 (रेई)˸ "संत मोनिका निश्चय ही एक दृढ़ महिला थी, वह अपने आचरण से मजबूत थी। वह एक ऐसी महिला थी जो एक पत्नी एवं माता के रूप में समाज में अपनी भूमिका से पूरी तरह वाकिफ थी। वह दृढ़ निश्चयी थी, जीवन दे सकती थी, अपने आस-पास के लोगों को अधिक मानवीय बना सकती थी। उसने इस कार्य को अपने पति एवं बच्चों के द्वारा दिखलाया जो उनके व्यवहार एवं ख्रीस्तीय जीवन में परिलक्षित हुआ। न केवल उसके बेटे अगुस्टीन का मन-परिवर्तन हुआ किन्तु उसके दो अन्य बेटों के जीवन में भी परिवर्तन हुआ। मोनिका निश्चय ही एक सफल महिला की आदर्श हैं किन्तु उसने भी कई बार गलती की। उसने ईश्वर की इच्छा और योजना पर अधिक ध्यान न देकर अपनी इच्छा अनुसार अपने बेटे अगस्टीन का मन-परिवर्तन चाहा था, पर ईश्वर ने धीरे-धीरे उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें एक आदर्श माँ बनने एवं ईश्वर के समय का सम्मान करना सिखलाया।" यह बात संतीसिसा अनुनचाता के अगुस्तीनियन धर्मबहन इलिजाबेथ तारकी ने कही।

संत मोनिका ने ईश्वर की इच्छा को स्वीकारा

संत अगस्टीन की माँ संत मोनिका ने जीवन की कठिन परिस्थिति में, ईश्वर की इच्छा को स्वीकार करना सीखने के द्वारा, विश्वास को बनाये रखा। उसकी ताकत प्रार्थना थी। संत पापा ने 27 अगस्त को संत मोनिका के पर्व दिवस पर एक ट्वीट प्रेषित कर सभी माताओं को संत मोनिका का अनुकरण करने हेतु प्रोत्साहन दिया।

संत पापा का ट्वीट संदेश

"प्रिय माताओ, संत मोनिका की तरह, कभी हताश मत होइये, अपने बच्चों के लिए अथक प्रार्थना कीजिए।" संत पापा ने 26 अगस्त को अकस्मिक रूप से संत अगुस्टीन महागिरजाघर जाकर संत मोनिका की कब्र का दर्शन किया जो रोम के पियात्सा नवोना के निकट स्थित है।

एक जिम्मेदार महिला

संत मोनिका का जन्म चौथी शताब्दी में हुआ था। वह एक धर्मी महिला थी और समाज में अपनी भूमिका को अच्छी तरह समझती थी किन्तु उसने अनुभव किया कि उसके बच्चे उसकी आशा के अनुसार नहीं चल रहे हैं, विशेषकर, पहला पुत्र अगुस्टीन। तब मोनिका ने ईश्वर पर भरोसा रखना सीखा, उनके समय का सम्मान करना तथा ईश्वर के स्थान पर नहीं बल्कि एक माता की भूमिका को पूरा करना सीखा और जिसके कारण उसने खुद मन-परिवर्तन का अनुभव किया।   

ईश्वर की इच्छा के प्रति आज्ञाकारी

वह एक जीवन देने वाली महिला थी, अधिक से अधिक लोगों को मानवीय बना सकती थी। उसने अपने पति को ख्रीस्तीय विश्वास की ओर प्रेरित किया, अपने बच्चों के सुख-दुःख में साथ दिया। ईश्वर ने उसकी प्रार्थना सुनी किन्तु अपने समय में उसे पूरा किया, अतः संत मोनिका महिलाओं की आदर्श हैं।

संत मोनिका के सदगुण

मोनिका के पुत्र अगस्टीन का विकास तभी हुआ जब उसकी माता ने अपनी अत्यधिक उपस्थिति को कम किया। मोनिका हमें धीरजवान माता बनने की प्रेरणा देती है, ईश्वर पर पूर्ण भरोसे के साथ इंतजार करने की ताकि बच्चे अपने समय पर परिपक्व बन सकें। वह एक गुणवती पत्नी बनने एवं बिना थके निरंतर प्रार्थना करने की भी प्रेरणा देती है क्योंकि ईश्वर हमारी हर आशाओं को पूर्ण कर देते हैं। 

28 August 2018, 16:13