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केरल के शिविरों में बाढ़ पीड़ित केरल के शिविरों में बाढ़ पीड़ित  (AFP or licensors)

केरल के बाढ़ से राहत कार्यों में धर्मबहनों की भूमिका

केरल में आये भीषण बाढ़ के बाद करीब 6,700 से अधिक काथलिक धर्मबहनें राहत शिविरों में हज़ारों बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रही हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

केरल के बाढ़ राहत कार्यों के शीर्ष अधिकारी फादर जोर्ज वित्ताकात्तिल ने कहा, "यह सबसे बड़ा बचाव और राहत अभियान है, जिसको केरल में काथलिक कलीसिया ने अपने इतिहास में किया है।"

उन्होंने कहा, "कलीसिया ने अपने सदस्यों को प्रदान किया तथा पूरे केरल में अपनी संस्थाओं को खोल दिया ताकि केरल में 15 से 20 अगस्त के बीच आये भीषण बाढ़ के विनाश के बाद लोगों को मदद दिया जा सके।"

केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजायान ने 24 अगस्त को पत्रकारों को बतलाया कि बाढ़ के कारण 417 लोगों की मौत हो गयी जबकि 36 लोग अब भी लापता हैं।

उन्होंने कहा कि बाढ़ के आरम्भ में 1.3 मिलियन लोग विस्थापित थे किन्तु अब 869,000 लोग 2,787 राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। करीब 200 बिलियन रूपये की क्षति हुई है।

कारितास इंडिया की सहायता

कारितास इंडिया जैसे काथलिक सहायता एजेंसियाँ बाढ़ पीड़ितों के बीच कार्य कर रहे हैं। इस कार्य में कारितास इंडिया ने 6.1 मिलियन रूपये खर्च किये हैं। बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, दवाइयाँ और आवश्यक वस्तुएं प्रदान किये जा रहे हैं। कारितास इंडिया के निदेशक फादर पौल मूनजेली का कहना है कि एजेंसी फिर से 10 मिलियन रूपये जुटाने की कोशिश कर रही है।

फादर जोर्ज ने कहा कि सरकारी एजेंसियों की सहायता से, केरल के 32 काथलिक धर्मप्रांतों के 69,821 युवा, 99,705 स्वयंसेवक, 6,737 धर्मबहनें, 2,891 पुरोहित और 354 गुरूकुल छात्र, राहत कार्यों में भाग ले रहे हैं।

धर्मबहनों के कार्य

धर्मबहनें खासकर, राहत शिविरों में आवश्यकताओं की पूर्ति करती तथा बूढ़ों, बच्चों एवं बीमार लोगों की देखभाल करती हैं।

भारत के धर्मसंघी सम्मेलन के केरल विभाग की सचिव सिस्टर मोदेस्ता ने कहा कि 30,903 धर्मबहनें जो 349 धर्मसंघों के हैं, केरल के राहत कार्यों में शुरू से जुड़े हैं।

सिस्टर मोदेस्ता ने कहा, "हमने पुरोहितों, धर्मबहनों एवं धर्मबंधुओं को एक साथ मिलाते हुए कई दलों का निर्माण किया है जो राहत शिविरों में रह रहे लोगों के घरों से मिट्टी हटाने का काम कर रहे हैं। वे सुबह में जाते और शाम तक काम करते हैं।"

वालियाप्लाकेल ने कहा कि धर्मबहनें विभिन्न तरह से लोगों की सहायता कर रही हैं ताकि वे अपने नुकसानों को भूल सकें।

शिविरों में मानवता

कोचूकिरा ने कहा कि उन्होंने शिविरों में मानवता को बहुत अधिक जीता जागता देखा। प्राकृतिक आपदा ने धनी और गरीब सभी को एक समान बना दिया है। यहाँ लोग एक साथ खा रहे हैं, सो रहे हैं एवं एक ही छत के नीचे एक-दूसरे के साथ समय व्यतीत कर रहे हैं। उसने शिविर में इस बात को भी गौर किया कि लोग बाहर से किस तरह भोजन और वस्त्र लेकर शिविरों की भेंट करने आ रहे हैं। उन्होंने कहा, "हर कोई ईश्वर के प्रेम को बांट रहा है।"

दो बच्चों की एक हिन्दू माँ सुधर्मा उथामान जो कुत्तानाद प्रांत में दो कमरे वाले घर में रहती थी, धर्मबहनों की सेवा की सराहना करते हुए कहा, "जब मैं शिविर में आयी तब मैं दुःखी थी क्योंकि मैंने सब कुछ खो दिया है। अब मैं खुश हूँ कि हम सब जीवित बच गये हैं।"   

उसने बतलाया कि उसके गाँव के अन्य लोगों के साथ उन्हें भी नाव द्वारा शिविर में लाया गया। उन्होंने कहा कि वे जैसे ही शिविर पहुँचे उन्हें चाय के साथ हार्दिक स्वागत किया गया। धर्म बहनों ने कपड़े एवं नहाने की सुविधाएं प्रदान कीं।

29 August 2018, 16:09