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पम्पलोना शहर में घायल युवा इग्नासियुस पम्पलोना शहर में घायल युवा इग्नासियुस 

ईश्वर के प्रेम में संत इग्नासियुस

येसु समाज के संस्थापक संत इग्नासियुस के पर्व दिवस पर उनके सद्गुणों, उनकी विशिष्ठताओं तथा आध्यात्मिकता पर एक नजर।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 31 जुलाई 2018 (वाटिकन सिटी)˸ संत इग्नासियुस लोयोला से प्रेरित होकर, हम अपने आपको दूसरों की सेवा में समर्पित करें। यह संदेश संत पापा फ्राँसिस ने गत साल संत इग्नासियुस के पर्व के अवसर पर ट्वीट प्रेषित कर दी थी। संत पापा फ्राँसिस येसु समाज से आने वाले पहले संत पापा हैं।

संत इग्नासियुस लोयोला येसु से मुलाकात करने के पहले शक्ति एवं दुनियादारी को बहुत अधिक प्यार करते थे किन्तु प्रभु की पुकार सुनकर उन्होंने अपना सब कुछ ईश्वर को समर्पित कर दिया। 

एक तीर्थयात्री

जेस्विट फादर जॉ पौल हेरनन्द ने बतलाया कि "एक व्यक्ति के रूप में संत इग्नासियुस बढ़ना और गतिशीलता पसंद करते थे। वे संत पापा फ्राँसिस की तरह बाहर निकलना चाहते थे।" उन्होंने कहा कि येसु समाज के कारिज्म के केंद्र में आज्ञापालन है जो हृदय की स्वतंत्रता है। एक येसु समाजी, ईश्वर को समर्पित होकर, परिस्थिति के अनुसार अपने को ढालता, उसकी गहराई पर जाता तथा प्रार्थना एवं आत्मपरख की जीवन शैली को अपनाता है। इस प्रक्रिया में संत इग्नासियुस की आध्यात्मिक साधना आधारभूत है जिसको न केवल जेस्विट पुरोहित करते बल्कि अन्य धर्मसमाजी एवं लोकधर्मी भी करते हैं।

आज जेस्विट

उन्होंने कहा, जेस्विट जीवनशैली का अर्थ है हरेक को उस क्षेत्र में निपुणता प्राप्त करना है जिसके लिए वह बुलाया जाता है। यही कारण है कि आज जेस्विट पुरोहित, नवीन सुसमाचार प्रचार के कार्यों एवं ज्ञान प्राप्ति में आज की चुनौतियों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। वे शरणार्थियों की भी विशेष देखरेख करते हैं जो आधुनिक युग की एक बड़ी समस्या है। अस्ताली केंद्र (जीआरएस) रोम में येसु समाजियों द्वारा संचालित एक ऐसा केंद्र है जिसमें करीब 100 देशों के कुल 17,000 शरणार्थियों की सहायता की जा रही है।    

संत इग्नसियुस

संत इग्नासियुस का जन्म स्पेन में सन् 1491 में हुआ था तथा उनकी मृत्यु 1556 ई. में रोम में हुआ। वे एक शूरवीर बनना चाहता थे किन्तु प्रभु ने उन्हें अपनी सेवा में बुलाया। सन् 1520 ई. में जब वे युद्ध में घायल हो गये तो उन्हें स्वस्थलाभ प्राप्त करने की एक लम्बी अवधि से होकर गुजरना पड़ा, इस अवधि में उन्होंने पवित्र बाईबिल को पढ़ा और उसके द्वारा ईश्वर से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण पल ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। इसके बाद उन्होंने येसु समाज की स्थापना की जिसे संत पापा पौल तृतीय द्वारा 1538 में अनुमोदन प्राप्त हुआ। संत पापा की आज्ञा का पालन करते हुए संत इग्नासियुस धर्मसमाज के क्रियाकलापों का संचालन करने तथा गरीबों, अनाथों और बीमारों की देखभाल हेतु रोम में ही रुक गये। इस प्रकार वे रोम के प्रेरित पुकारे जाने लगे। संत इग्नासियुस का अवशेष रोम स्थित येसु गिरजाघर में स्थापित किया गया है।   

31 July 2018, 17:39