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जापान में बाढ़ के बाद लोगों की स्थिति जापान में बाढ़ के बाद लोगों की स्थिति  (AFP or licensors)

सुसमाचार प्रचार का अर्थ मानवता की शिक्षा देना, पीमे फादर

सुसमाचार पर आधारित मानवता की खोज करने वाले फादर लेम्बो ने अपने मित्र रफायला एवं सिमोन के साथ युवाओं के लिए एक पहल जारी की है। इसके तहत उन्होंने एक अंतरधार्मिक उत्सव का आयोजन किया था जिसका केंद्रविन्दु था हृदय एवं शरीर के बीच मिलन विन्दु की खोज करना। इस आयोजन में चार गैरख्रीस्तीय युवाओं ने भी हिस्सा लिया था।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

रोम, बृहस्पतिवार, 12 जुलाई 2018 (एशियान्यूज)˸ जापान एक आदर्श समाज प्रतीत होता है किन्तु यह व्यक्तियों को कुचलता है। सुसमाचार प्रचार बपतिस्मा संस्कार की ओर ले जाना नहीं है किन्तु मानवता की शिक्षा देना है और एक मानवीय रूप में अपने आप के साथ, दूसरों के साथ एवं सर्वशक्तिमान के साथ संबंध स्थापित करना है। उक्त बातें पीमे के क्षेत्रीय अधिकारी फादर अंद्रेया लेम्बो ने कही।

ख्रीस्तीय होने का सच्चा अर्थ

फादर लेम्बो ने कहा, "एक कहावत है, जापान में हम शिनतो जन्म लेते हैं ख्रीस्तीय के रूप में विवाह करते और बौद्ध जैसे मरते हैं।" उन्होंने कहा कि यही जापान का मानव विज्ञान संकट है जो पूर्ण रूप से सही सलामत दिखाई पड़ता किन्तु व्यक्तियों को कुचलता है। यही कारण है कि सुसमाचार प्रचार को बपतिस्मा संस्कार देना नहीं माना जाना किन्तु सुसमाचार के आधार पर मानवता की शिक्षा देना और येसु से मुलाकात करना है जिनके द्वारा हम अधिक मानवीय बनते है। ख्रीस्तीय होने का सच्चा अर्थ है दूसरों के लिए जीवन अर्पित करना, उन्हें अपना प्रेम देना। 

युवाओं के साथ कार्य करने वाले फादर लेम्बो बपतिस्मा देने के लिए अनिच्छुक हैं यदि व्यक्ति उन रास्तों को नहीं अपनाता है, जो मानवता की ओर ले चलते हैं जिसमें वह उन मूल्यों को सीख सकता है, जिनसे समाज भ्रष्ट होने से बचता है।

उन्होंने कहा, "हम जो अनुभव करते हैं, उसमें अपने आंतरिकता, अंतरंगता और मानवता में परिवर्तन करना चाहिए।" यह एक आवश्यक मानवविज्ञान प्रक्रिया है, जिसमें कलीसिया स्वयं "संघर्ष करती है। एक थकान जो जीवन के सभी पहलुओं में महसूस की जाती है, यहाँ तक कि एक "काथलिक पत्नी के लिए भी यह कठिन हो जाता है कि वह अपने पति के साथ आकर कहे कि फादर मेरे पति को बपतिस्मा चाहिए अन्यथा मरने के बाद हम अलग हो जायेंगे।"

 जापान में मिशन

फादर ने कहा कि जापान में मिशन की कठिनाई यही है। अन्य देशों में हम उन मानवीय मूल्यों को उदार कार्यों के माध्यम से देने का प्रयास करते हैं किन्तु जापान में ऐसा नहीं है यहाँ आवश्यक है एक साथ चलना। हमारे पास कुछ नहीं है किन्तु इस मानवीय मूल्य के द्वारा हम उन्हें अपना उपहार देते हैं, ऐसा उपहार जो व्यक्ति को अधिक मानवीय होने का एहसास देता, यही सुसमाचार प्रचार है क्योंकि इसके द्वारा उन्हें आत्मीयता की अनुभूति मिलती है।

फादर लेम्बो के लिए यह मिशन संकट की स्थिति में है, उन्होंने कहा, "शायद इसलिए क्योंकि हम नास्तिकता का सामना करने के लिए तैयार नहीं हैं जिसे "ईश्वर के बिना विश्व" के रूप में परिभाषित किया जाता है किन्तु मैं इसे व्यक्ति के बिना विश्व पुकारना चाहूँगा क्योंकि यदि हम मानवता की खोज करते हैं तो हम ईश्वर की निश्चितता को पाते हैं और यह किसी भी धर्म के लिए सच है।

युवा लोगों के साथ कार्यशाला

सुसमाचार पर आधारित मानवता की खोज करने वाले फादर लेम्बो ने अपने मित्र रफायला एवं सिमोन के साथ युवाओं के लिए एक पहल जारी की है। इसके तहत उन्होंने एक अंतरधार्मिक उत्सव का आयोजन किया था जिसका केंद्रविन्दु था हृदय एवं शरीर के बीच मिलन विन्दु की खोज करना। इस आयोजन में चार गैरख्रीस्तीय युवाओं ने भी हिस्सा लिया था।

फादर लेम्बो ने कहा कि यही सुसमाचार प्रचार है, प्रत्येक को उसकी संस्कृति, मौलिक संबंधों में (अपने साथ, अनंत के साथ, दूसरों के साथ और प्रकृति के साथ) मानवीय अनुभवों को जोड़ना है। हम जहां मानवीय अर्थ प्रदान करते हैं वही वह हमें बढ़ने में मदद देता है।

12 July 2018, 17:53