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कंधमाल के ख्रीस्तीय कंधमाल के ख्रीस्तीय 

जेल में बंद ख्रीस्तियों के लिए अभियान जारी

ओडिशा में ख्रीस्तीय दंगों के संबंध में जेल में सात निर्दोष ख्रीस्तियों की रिहाई की मांग करने वाले एक ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान ने 11 जुलाई को 50,000 हस्ताक्षरों के मील का पत्थर पार किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

ओडिशा में ख्रीस्तीय दंगों के संबंध में जेल में सात निर्दोष ख्रीस्तियों की रिहाई की मांग करने वाले एक ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान ने 11 जुलाई को 50,000 हस्ताक्षरों के मील का पत्थर पार किया।

अभियान का नेतृत्व कर रहे, पत्रकार एवं लेखक एंटो अक्कारा ने 12 जुलाई को एक प्रेस वक्तव्य में कहा कि सात ख्रीस्तियों में से छह अशिक्षित और एक मानसिक रूप से बीमार है इनकी रिहाई के लिए हस्ताक्षर किए गये हैं।

23 अगस्त, 2008 को स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के आरोप में जेल लिये गये सात ख्रीस्तीयों के नाम हैं, भास्कर सुनामाझी, बीजय कुमार संसेथ, बुद्धानदेव नायक, दुर्जो सुनामाझी, गोर्नाथ चलेन्सेथ, मुंडा बादामाझी और सानाथान बादामाझी।

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या ने ख्रीस्तियों के विरुद्ध छह सप्ताह की लंबी हिंसा को जन्म दिया, जिसके परिणामस्वरूप कुछ 100 ख्रीस्तियों की मौत हो गई। कट्टरवादियों और उग्र समूहों ने 300 गिरजाघरों और 6,000 ईसाई घरों को जला दिया था।

एक अन्वेषण पुस्तक 'हू किल्ड स्वामी लक्ष्मणानंद' (स्वामी लक्ष्मणानंद को किसने मारा) के लेखक  अक्कारा ने कहा कि मारे गए स्वामी के शरीर को गांव वालों के बीच ख्रीस्तीय विरोधी भावनाओं को उकसाने के लिए जानबूझकर ज़िगज़ग करते हुए मार्ग में दो दिनों तक कंधमाल में परेड किया गया था।

अक्कारा की जांच और दावों के अनुसार, स्वामी की हत्या कट्टरपंथी हिंदू समूहों के आदेश पर अनुबंध हत्यारों के माध्यम से हासिल की गई थी। पुस्तक में हत्या के लिए सात ख्रीस्तियों को सुनाई गई सजा में न्यायिक अपर्याप्तता भी दिखाई गई है।

अक्कारा ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि मुकदमे के दौरान दो न्यायाधीशों को स्थानांतरित कर दिया गया था और तीसरे न्यायाधीश ने "एक क्रांतिकारी ख्रीस्तीय षड्यंत्र सिद्धांत के आधार पर," अभियुक्तों को 2013 में स्वामी की हत्या के लिए कारावास की सजा सुनाई थी।

अक्कारा ने कंधमाल के हत्या और न्याय के उत्पीड़न को अभिलेखन किया है।  3 मार्च, 2016 को वेबसाइट www.release7innocents.com के माध्यम से ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू किया।

प्रत्येक ऑनलाइन हस्ताक्षर तत्काल तीन ई-मेल भारत के मुख्य न्यायाधीश,  राष्ट्रपति और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को भेजा जाता है। अभियान की दूसरी सालगिरह पर, इसे ओडिशा के उच्च न्यायालय में चौथे ई-मेल के लिए भी संशोधित किया गया है।

14 July 2018, 16:22